Thursday, 13 September 2018

ये ना होते तो आज हम गणेशोत्सव नहीं मना रहे होते

नमस्कार दोस्तों,  आज गणेश चतुर्थी है, और घर में गणपति बप्पा विराजमान हो गये हैं,  गणेशोत्‍सव को पूरे उमंग और उल्‍लास के साथ देशभर में मनाया जाता है। मगर क्‍या आप जानते हैं इसको मनाने की परंपरा सबसे पहले कहां से शुरू हुई? आज हम आपको बताते हैं,  गणेश उत्‍सव की शुरुआत सबसे पहले महाराष्‍ट्र से हुई। गणेश चतुर्थी के दिन से इसका आरंभ होता है और फिर 11वें दिन यानी अनंत चतुर्दशी पर गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ इसका समापन होता है।
शिव पुराण में इस बात का उल्‍लेख मिलता है कि इस त्‍योहार को मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। भारत के दक्षिण और पश्चिम राज्‍यों में इस त्‍योहार की विशेष धूमधाम रहती है। भारत में जब पेशवाओं का शासन था, तब से वहां गणेश उत्‍सव मनाया जा रहा है। सवाई माधवराव पेशवा के शासन में पूना के प्रसिद्ध शनिवारवाड़ा नामक राजमहल में भव्य गणेशोत्सव मनाया जाता था। जब अंग्रेज भारत आए तो उन्होंने पेशवाओं के राज्यों पर अधिकार कर लिया। तब से वहां इस त्‍योहार की रंगत कुछ फीकी पड़ना शुरू हो गई। लेकिन कोई भी इस परंपरा को बंद नहीं करवा सका,
ऐसे मनाया जाने लगा 11 दिन का उत्‍सव
अब हम बताते हैं कि ये उत्सव 11 दिन का कैसे हो गया,  अंग्रेज सत्‍तासीन होने के बाद हिंदुओं पर पाबंदियां लगाने लगे। इतिहास में बताया गया है कि कुछ शासकों के गलत निर्णयों के चलते हिंदुओं में अपने ही धर्म के प्रति कड़वाहट पैदा हो गई और लोगों में धर्म के प्रति उदासीनता बढ़ती चली गई। उस समय महान क्रांतिकारी व जननेता बाल गंगाधर लोकमान्य तिलक ने सोचा कि हिंदू धर्म को कैसे संगठित किया जाए? लोकमान्य तिलक ने विचार किया कि श्रीगणेश ही एकमात्र ऐसे देवता हैं जो समाज के सभी स्तरों में पूजनीय हैं।
उन्‍होंने हिंदुओं को एकत्र करने के उद्देश्‍य से पुणे में सन 1893 में सार्वजनिक गणेश उत्‍सव की शुरुआत की। तब यह तय किया गया कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से भाद्रपद शुक्ल चतुर्दशी (अनंत चतुर्दशी) तक गणेश उत्सव मनाया जाए और तब से पूरे महाराष्‍ट्र में यह उत्‍सव 11 तक मनाया जाने लगा। उसके बाद देश के बाकी राज्‍यों में भी इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाने लगा।
https://youtu.be/zhTWYkR1qyo

No comments:

Post a Comment